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सहर्ष स्वीकार

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उस अभेद्द भीड़ में विपरीतता का सामना करते हुए  अनगिनत अनजान चेहरों को अपनी तरफ आते देख  मैं अपना रास्ता नहीं बदलता  विपरीतता का आलिंगन करने वाला मैं इसे "सहर्ष स्वीकार" करता हूँ। 
किसी चीज़ को घूरे बगैर  केवल अपनी आँखों को तरेरते हुए  मैं महसूस करता हूँ अनगिनत भावनायें  जो अनकही सी मुझे आकर्षित करती है  विपरीतता का आलिंगन करने वाला मैं इसे "सहर्ष स्वीकार" करता हूँ।
अनेक सजीव और निर्जीव चीज़ों से घिरा  मैं वहाँ अकेला जन्तु नहीं  जो सम्भावनाअों के मौसम में उपलब्धियाँ याद करता है  अपने मार्ग का स्वयं पथ-प्रदर्शक  विपरीतता का आलिंगन करने वाला मैं इसे "सहर्ष स्वीकार" करता हूँ।
~~ अतुल कुमार शर्मा ~~