"यहाँ के सिकन्दर"
चाहे जानबुझकर पर सब्र रखते है हम।
मौका मिलने पर कुछ ऐसा कर जायेंगे,
लोग देखेंगे "यहाँ के सिकन्दर" है हम।
अंजानी राहों पर हम जैसे निकल पड़े,
अंजान नहीं इस बात से कि राह में रोडें अड़े।
मंजिल से ऊँचें हम सपनें रखते है,
जीवन की सत्यता को परछाई में रखते है।
आकाश की आकाशवाणी हम धरती से करते है,
तभी तो जमीं पर सितारे उगाया करते है।
जज्बा है, हिम्मत हैं, जुनून है ऐसा कि,
सफलता को वार-वार, हार को तार-तार करते है।
सीखना है सीख तुमको समय कहाँ अब सीख लो,
तुम भी वो कर सकते हो जो सपने में देख लो।
आसान नहीं होता पर नामुमकिन भी कहाँ है,
तुम्हारें उजालें से दमकता नया सूरज यहाँ है।
~अतुल कुमार शर्मा~
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